the lost traveller
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Tuesday, September 20, 2011
बारिश
तुम चले गए कोई बात नहीं पर एक शिकायत है तुमसे
जाने तुम क्या कह जाते हो जाते जाते इस मौसम से
वो ले जाता है बहारों को, आ जाता है सावन छम से
वो भी बरसे, हम भी बरसें, न हम कम न वो कम हमसे
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